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IAS Amaneet और Y Puran Kumar की संपत्ति की जांच को लेकर PIL IAS D. Suresh भी निशाने पर

IAS Amaneet और Y Puran Kumar की संपत्ति की जांच को लेकर PIL IAS D. Suresh भी निशाने पर

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IAS Amaneet और पूर्व IPS Y Puran Kumar के खिलाफ भ्रष्टाचार और अघोषित संपत्ति के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दाखिल की गई है। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता बलजीत बेनिवाल द्वारा दायर की गई है।

याचिका में मांग की गई है कि इन मामलों की जांच राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से लेकर CBI को सौंपी जाए ताकि जांच स्वतंत्र और पारदर्शी रूप से पूरी हो सके। याचिका में कहा गया है कि आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार और उनके दिवंगत पति आईपीएस अधिकारी वाई. पूरण कुमार से संबंधित अघोषित संपति के मामलों की जांच में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य की एजेंसियां इन मामलों में प्रभावशाली अधिकारियों के दबाव में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर पा रही हैं।

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इसी प्रकार आईएएस अधिकारी डी. सुरेश के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों को भी सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन अधिकारियों से जुड़े मामलों में जांच को जानबूझकर धीमा किया गया है ताकि ठोस साक्ष्य सामने न आ सकें।

याचिका में कहा गया है कि चंडीगढ़ पुलिस एफआईआर संख्या 156, दिनांक 9 अक्टूबर 2025 की जांच समयबद्ध रूप से पूरी करे। यह मामला आईपीएस अधिकारी वाई. पूरण कुमार की मृत्यु से जुड़ा है, जो उस समय आईजी, पीटीसी सुनारिया (रोहतक) के पद पर तैनात थे। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण के बाद जांच से ध्यान भटकाने के लिए कुछ व्यक्तियों द्वारा जातिगत और व्यक्तिगत मुद्दों को हवा दी जा रही है। याचिका में कहा गया है कि इस विवाद को मीडिया और सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है ताकि भ्रष्टाचार और अघोषित संपत्ति के मामलों की जांच कमजोर हो जाए।

याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि ऐसी अपुष्ट खबरों और मीडिया रिपोर्टों को रोका जाए जो जांच को प्रभावित कर सकती हैं या किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं। उनका कहना है कि यह प्रवृति न केवल न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है, बल्कि ईमानदारी से काम कर रहे अधिकारियों के मनोबल को भी गिरा रही है।

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याचिका में कहा गया है कि मीडिया ट्रायल जैसी गतिविधियों से न्याय प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ता है। अपुष्ट दस्तावेजों, निजी बयानों और अफवाहों के आधार पर खबरें प्रकाशित की जा रही हैं, जिससे जनमानस भ्रमित हो रहा है। इससे जांच एजेंसियों पर भी दबाव बन रहा है और प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं।

श्री बेनिवाल ने कहा कि यह मामला अब केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं रहा, बल्कि यह राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के शासन को प्रभावित कर रहा है। कई अधिकारी अब निष्पक्ष कार्रवाई करने से हिचक रहे हैं, जिससे शासन की विश्वसनीयता पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि याचिका का उ‌द्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच ईमानदारी से हो और सच्चाई सामने आए। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से निष्पक्ष जांच को बल मिलेगा और राज्य प्रशासन में पारदर्शिता बहाल होगी।

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